क्यों किस्मत का रोना रोते हो॥ जो राहो में कंकण पत्थर है॥
संघर्षशील जीवन को झेलो॥ माया का यही समंदर है॥
अर्थहीन जब बात करोगे॥ क्या अर्थ शाष्त्री बन जाओगे॥
बिन लय सुर के आलाप भरोगे॥ क्या सच्चे गायक बन जाओगे॥
इस धरती कर जीवन जीने का ॥ कर्म ही उन्नति का मंतर है॥
बाजू में ताकत रहती है॥ समय सत्य का खंजर है॥
बचकानी बात कर कर के॥ क्या जीवन सफल बना पाओगे॥
(जाना है मैंने भी। माना है मैंने भी॥
वक्त की आवाज को .पहचाना है मैंने भी॥
जालिम है दुनिया जालिम जमाना॥
जालिम की आवाज को ..अंदाजा है मैंने भी )
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