रविवार, 18 दिसंबर 2011

आलू गाज़र प्यार भइल बा..

आलू गाजर प्यार भइल बा

चुम्मा दिये निनारे मा

एक का छोडे एक का पकडे

मजा करय खलिहाने मा

भैआ खड़े दुआरे ताकय

मैया खड़ी पिछवाड़े बा

लाज शरम सब छूट गइल बा

शीटी बजे ओसारे मा

केहू कय दर अब रहली

केहू कय मानय बात

ऐसा कलयुग आय गईल बा

रस चूसे तहखाने मा

अगर केहू जब करय शिकायत

तब देखा गुर्राय...

जैसे शेर गरजे गंजल मा

वैसे खडा देखाय...

इनसे अबतो राम बचावे...

रास रचवाय सिरहाने मा

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