आलू गाजर प्यार भइल बा॥
चुम्मा दिये निनारे मा॥
(आधी रात की उठ उठ भागय॥
छुपा मिलय तहखाने मा॥)
भैया खडा दुआरे ताके॥
मैया कड़ी पिछवाड़े बा॥
लाज शर्म सब छूट गयी बा॥
सीटी बजे ओसारे मा॥
चलत इशारा हाथ से करिहय॥
मौक़ा मिळत पकादिहय हाथ॥
न केहू कय डर अब रहिगे॥
न केहू कय माने बात॥
ऐसा कलयुग आय गइल बा॥
रस चूसे मयखाने मा॥
अगर केहू जब कराय शिकायत ॥
तब देखा गुर्राय ॥
जैसे शेर जंगल मा गरजै॥
वैसे खडा देखाय...
इनसे अबतो राम बचावय॥
रास राचावय सिरहाने मा..
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