रविवार, 18 दिसंबर 2011

आलू गाज़र प्यार भइल बा..

आलू गाजर प्यार भइल बा

चुम्मा दिये निनारे मा

एक का छोडे एक का पकडे

मजा करय खलिहाने मा

भैआ खड़े दुआरे ताकय

मैया खड़ी पिछवाड़े बा

लाज शरम सब छूट गइल बा

शीटी बजे ओसारे मा

केहू कय दर अब रहली

केहू कय मानय बात

ऐसा कलयुग आय गईल बा

रस चूसे तहखाने मा

अगर केहू जब करय शिकायत

तब देखा गुर्राय...

जैसे शेर गरजे गंजल मा

वैसे खडा देखाय...

इनसे अबतो राम बचावे...

रास रचवाय सिरहाने मा

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

आलू गाजर प्यार भइल बा

चुम्मा दिये निनारे मा

(आधी रात की उठ उठ भागय

छुपा मिलय तहखाने मा॥)

भैया खडा दुआरे ताके

मैया कड़ी पिछवाड़े बा

लाज शर्म सब छूट गयी बा

सीटी बजे ओसारे मा

चलत इशारा हाथ से करिहय

मौक़ा मिळत पकादिहय हाथ

केहू कय डर अब रहिगे

केहू कय माने बात

ऐसा कलयुग आय गइल बा

रस चूसे मयखाने मा

अगर केहू जब कराय शिकायत

तब देखा गुर्राय

जैसे शेर जंगल मा गरजै

वैसे खडा देखाय...

इनसे अबतो राम बचावय

रास राचावय सिरहाने मा..

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

श्रीमान जी सादर नमस्कार
मै उत्तर प्रदेश प्रताप गढ़ का रहने वाला हूँऔर मेरा परिवार गाँव में ही रहता मै गरीबी रेखा के नीचे आता भी हूँ लेकिन अभी तक हमें कोई सुविधाए नहीं मिली हैलेकिन दुःख मुझे इस बात का है मेरे पिता का निधन करीब साल पहले हो चुका हैलेकिन आज तक हमारी माँ को विधवा पेंशन नहीं मिलाती हैजो पहले के प्रधान थे समझे तो वही अब भी प्रधान वहा पर एक कुर्मी जीता हुआ है..(उस कुर्मी की पत्नी वहा की ग्राम प्रधान है ) लेकिन आज भी सारा काम पुराने प्रधान करते हैहमें इस बात का दुःख है की क्या हमारी माँ को विधवा पेंशन नहीं मिलनी चाहिए या ग्राम प्रधान किसी कारण बस या दुश्मनी से नहीं दिला रहा हमने उस पुराने प्रधान से कई बार बात किया वह वही अश्वाशाशन दिया जल्द ही आप की माँ को विधवा पेंशन मिलने लगेगीऔर हमारे गाँव में अगर सर्वे करा लिया जाए तो आधे लोग ऐसे निकलेगे जो वृद्धा पेंशन ले रहे हैलेकिन उनकी उम्र पेंशन लेने योग्य नहीं क्रप्या हमें सलाह दे हो सके तो कार्यवाही करवा सकते हैतो मै भी आप का आभारी रहोगा...
शम्भू नाथ ..कलापुररानीगंज कैथौलाप्रताप गढ़उत्तर प्रदेश

गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

जाना है मैंने भी

क्यों किस्मत का रोना रोते होजो राहो में कंकण पत्थर है

संघर्षशील जीवन को झेलोमाया का यही समंदर है

अर्थहीन जब बात करोगेक्या अर्थ शाष्त्री बन जाओगे

बिन लय सुर के आलाप भरोगेक्या सच्चे गायक बन जाओगे

इस धरती कर जीवन जीने काकर्म ही उन्नति का मंतर है

बाजू में ताकत रहती हैसमय सत्य का खंजर है

बचकानी बात कर कर केक्या जीवन सफल बना पाओगे

(जाना है मैंने भीमाना है मैंने भी

वक्त की आवाज को .पहचाना है मैंने भी

जालिम है दुनिया जालिम जमाना

जालिम की आवाज को ..अंदाजा है मैंने भी )

नशे में जब होता हूँ

नशा से चूक जाता हूँ...

नशा चढ़ती मुझपर है

मै उससे रूठ जाता हूँ

कोशिश तो करता हूँ उठने की

पैर यूं ही डगमगाते है

मिलते है रास्ते में जो मुझसे॥

मुझे धक्के लगाते है...

कुछ तो हंसते मुझपे है

कुछ बेबात सुनाते है

मै सुनता अपनी मस्ती में

बेसुरा जो गीत गाता हूँ

संभल के चलना सीखा है

रोकती राह मेरी

उलझने पैदा करती है

क्रोध का समुन्दर जो

उन्ही से पिटते पिटाते

मै अपने को खो देता हूँ...

ढूढता उस नशीली को

नशा को लील जाता हूँ...

गमो की होती बारिश जब

उसी में भीग जाता हूँ

उतरती जब नशा मुझसे

मै खोजता बुझती ताकत को

घूमता हूँ दर दर भटकता

मांगता सस्ती आफत को

जो गिराती मुझको खायी में

दुबाती गंदे पानी में

लगा देती कीचड़ कलंक

अब दम नहीं सच्ची जवानी में

उसी के लत में जीना सीखा

उसी का प्यार गाता हूँ...

पहिन के आओ चटक साडी

होलिया मा आवा रंग डाली

पहले रंग तोहरे अंखिया से खेलब

अंखियन कय पुतरी कजरारीहोलिया मा आवा

दूसरा रंग तोहरे गलवा से खेलब,,

लाल लाल गलवा मसल डाली... होलिया मा आवा

तीसरा रंग तोहरे जोबना से खेलब

खुल जाए चोली बजे ताली... होलिया मा आवा

चौथा रंग तोहरे कमर से खेलब

पतली कमरिया मरबू सिसकारीहोलिया मा आवा रंग

पंचवा रंग तोहरे देहिया से खेलब

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

गम कभी आने न देंगे.

अग्नि को साक्षी मान कर

सात फेरे हम लिए है

हम तुझे जाने देंगे

गम कभी आने देंगे

लड़ जाए गे उस बला से

जो तेरा अपमान करे

मांगना है मांग मांग लो जो

आसमा के तारे देंगे

गम कभी आने देंगे

हम तुझे जाने देंगे

जब तक जिन्दा रहे जम पर

हम तुम्हे हंसना सिखाये

गर कभी आये मुशीबत

साथ मिल कर उसे भगाए

कल तेरा कोई मीत आये

हम उसे आने देंगे

हम तुझे जाने देंगे

हंसी खुसी से रहे यहाँ सब

यही दुआ तुम कीजिये

कोई भूँखा जाए द्वार से

खाना उसको दीजिये

गर कोई आँख तुमको दिखाए

आँख उसकी फोड़ देंगे

हम तुझे जाने देंगे

शनिवार, 10 दिसंबर 2011

दया करो प्रभु..

प्रभु दया करो इस बालक पर

जो मंदिर में तुम्हारे आया है

अपनी अर्श लगा करके

जो चरणों में शीश झुकाया है

जल डूबत गजराज छुडाया

द्रोपत सुता की लाज बचाया

गौतम ऋषि अहिल्या तारा

अत्याचारी कंस को मारा

बागो से फूलो को चुन चुन का

चरणों पे लाके चाढाया है

प्रभु दया करो इस बालक पर॥

जो मंदिर में तुम्हारे आया है॥

मन में कोई पाप रहे

लोगो से संताप रहे

हम चले सत्य की राहो पर

प्रभु चरणों का आशीर्वाद रहे

भोले दया करो इस बालक पे

जो कब से आश लगाया है

प्रभु दया करो इस बालक पर॥जो मंदिर में तुम्हारे आया है॥

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

चला चली गाँव की ओर॥२।

चला चली गाँव की ओर

यहाँ पे देखो वहा पे देखो

खुल्लम खुल्ला करते शोर

चला चली गाँव की ओर॥२।

वहा पे चाचा बुद्धू काका

आजा आजी नानी नाना

बड़े सबेरे उठते भोर

चला चली गाँव की ओर॥२।

यहाँ पे आयी ये बेकारी

दाता ये कैसे बेरोजगारी

घूंस खोरी की लगी है डोर

चला चली गाँव की ओर॥२।

अफसर नेता और सिपाही

करते बेकसूर पिटायी

ये कैसी है ताकत जोर

चला चली गाँव की ओर॥२।

शिव भजन

डम डम डमरू बजाय रहे भोला

मोहिनी सुरतिया देखाय रहे भोला

भोले के सर पर गंगा विराजे

गंगा की लहरे हिलाय रहे भोला

डम डम डमरू बजाय रहे भोला॥

मोहिनी सुरतिया देखाय रहे भोला॥

भोले के सर पर चंदा विराजे

चन्दा की चमक चमकाय रहे भोला

डम डम डमरू बजाय रहे भोला॥

मोहिनी सुरतिया देखाय रहे भोला॥

भोले गले में नाग लपेटे

नाग की फन फन्काय रहे भोला

डम डम डमरू बजाय रहे भोला॥

मोहिनी सुरतिया देखाय रहे भोला॥

भोले की लीला शम्भू लिखत है

शम्भू को लीला देखाय रहे भोला

डम डम डमरू बजाय रहे भोला॥

मोहिनी सुरतिया देखाय रहे भोला॥

बुधवार, 9 नवंबर 2011



मै एक गरीब परिवार से हूँऔर दिल्ली में रोजी रोटी के लिए बताक रहा हूँ



मै भटक रहा हूँदर दर पर



अभी नहीं मंजिल मिली है



राह में कंकण बहुत



कालिया अभी नहीं खिली है...