रोज रोज हटवा के बाजे ला कंगनवा॥
कोठवा पे कोयल बोले मोरवा अंगनवा॥
बदरवा रिम झिम बरषे॥
तितली का उड़त देख उडयलाग मनवा॥
जुगनू के चम चम से इथे ल बदनवा॥
बदरवा रिम झिम बरषे॥
पोर पोर टपके ल चढ़ती जवानी॥
अंखिया बतावे लागी प्रेम कई कहानी॥
लच्कल कमरिया से उठे ल घंघरवा
बदरवा रिम झिम बरषे॥
फूक फूक गोड़ धरी बहुत शरमाई॥
mनवा के पीर अपने केह्से बतायी॥
जोबना के जोर से हटे ला आचार्वा॥
बदरवा रिम झिम बरषे॥
मंगलवार, 18 अगस्त 2009
रविवार, 16 अगस्त 2009
गौरैया नही दिखाई है॥
छोटी चिडिया आँगन में आकर॥
चावल के किनके चुगती थी॥
चारो तरफ़ फुदक फुदक के॥
ची ची ची ची करती ही॥
उस समय आँगन में मेरे ॥
अद्भुत शोभा होती थी॥
पता नही क्या कारन है अब॥
शायद चावल में नही मिठाई है॥
कई महीने बीत गए ॥
गौरैया नही दिखाई है॥
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