रविवार, 16 अगस्त 2009

गौरैया नही दिखाई है॥

छोटी चिडिया आँगन में आकर॥

चावल के किनके चुगती थी॥

चारो तरफ़ फुदक फुदक के॥

ची ची ची ची करती ही॥

उस समय आँगन में मेरे ॥

अद्भुत शोभा होती थी॥

पता नही क्या कारन है अब॥

शायद चावल में नही मिठाई है॥

कई महीने बीत गए ॥

गौरैया नही दिखाई है॥

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