अपने सपनों की चाहत पूरी करने के लिए..निकल पड़े है॥ राह मिल गई है..रास्ता कठिन है॥ यहाँ वीरान जंगल नही है..नदिया नही है॥ उबड़ - खाबड़ नही है॥ दल दल नही फ़िर भी जिंदगी मौत बन गई है॥ यहाँ पर तो लोगो को मरते देख कर के रूह काँप जाती है॥ आत्मा रोने लगाती है॥ यहाँ के लोग भी ऊँट पतंग है॥ सभ्यता उनके रगरग में बाशी है॥ अभी आप रास्ता पुँछ लो की हमें फला जगह जाना है। तुंरत बोलेगे..भाई साहब आप इस रास्ते से जा सकते है॥ लेकिन रास्ता ग़लत होगा॥ रास्ते पर चलते समय आप को ध्यान देना होगा। की जिंदगी कही मौत न बन जाए कही॥
बुधवार, 29 जुलाई 2009
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