शनिवार, 18 जुलाई 2009

बादल की बरात..

आज बादल बरात है लाया॥

उमड़ घुमड़ कर धरती पर॥

आतिश बाजी हो रही है ॥

दुल्हन के ड्योढी पर॥

हरियाली दुल्हन बन बैठी॥

कलियाँ उसे सजा रही है॥

कीट पतंगे नाच दिखाते॥

वर्षा माँ मुस्का रही है॥

देव लोक से पुष्प बरसते ॥

दुल्हन देल्हे की भावरी पर॥

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