आज बादल बरात है लाया॥
उमड़ घुमड़ कर धरती पर॥
आतिश बाजी हो रही है ॥
दुल्हन के ड्योढी पर॥
हरियाली दुल्हन बन बैठी॥
कलियाँ उसे सजा रही है॥
कीट पतंगे नाच दिखाते॥
वर्षा माँ मुस्का रही है॥
देव लोक से पुष्प बरसते ॥
दुल्हन देल्हे की भावरी पर॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें