रविवार, 19 जुलाई 2009


उनकी काली करतूतों को हम सुंदर अक्षरो के साथ सादे कागज़ पर उतारा करे...गे


इनता ही नही शुरीली आवाज़ से श्रोताओ के कानो तक उनकी बुरइयो की भनक हम पहुचाया करेगे...


लेखनी रुक नही सकतीचाहे तुम जीतनी जातां कर लो



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