उनकी काली करतूतों को हम सुंदर अक्षरो के साथ सादे कागज़ पर उतारा करे...गे॥
इनता ही नही शुरीली आवाज़ से श्रोताओ के कानो तक उनकी बुरइयो की भनक हम पहुचाया करेगे...
लेखनी रुक नही सकती ॥ चाहे तुम जीतनी जातां कर लो॥
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