सोमवार, 20 जुलाई 2009

सच के बीज जो बोते..है..

हैरानी के बीज जो बोओगे॥

तो धरती बंजर हो जायेगी॥

सूख जायेगे झरने नैया॥

मरने की नौबत आ जायेगी॥

हवा न देगी ढंडक उनको॥

मौसम न उन्हें नहलाएगा॥

सच्चाई की थाप पड़ेगी॥

हस हस गगन रुलाएगा॥

पाखंडी पापी चिल्लायेगे॥

काल की कुर्की जब आएगी॥

अत्याचारी की मधाही जो है॥

सच्चाई उन्हें धहाएगी॥

उनके संतापों की अन्तिम लीला

हाय हाय करते जायेगी...

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