रूदन करे मन की अभिलाषा॥
सूख गयी हो प्रेम पिपासा॥
मन कुंठा हो रूदन करे॥
बीते कल का प्रेषण करे॥
तब ध्यान भंग हो जाता है॥
बीता पल रुलाता है॥
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