दिल से धुँआ निकल गवा॥
नकेल खुल गयी॥
रोहित को छोड़ पम्मी॥
दूजे को मिल गयी॥
रोहित बेचारा टूट गवा॥
दारू का जाम लेता॥
बिस्तर पर पडा हरदम॥
पम्मी का नाम लेता॥
नफरत करय ज़माना॥
बिरावय लाग तरैया॥
पूचय प्रश्न टोक के ॥
ऊपर वाली जोधैया॥
रस्तय माँ नैया डूबी॥
ऊ रास्ता भटक गयी॥
रोहित को छोड़ पम्मी॥
दूजे को मिल गयी॥
रविवार, 13 सितंबर 2009
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