हम मानवता के दीप है॥
जो करते प्रकाश॥
सच कैनी पकड़ कर॥
चले जाते उस पार॥
आगे कदम बढ़ता रहे॥
मौसम भी मुस्कात॥
बसी बुराई दूर है॥
आवत लागे लाज... त्याग दिया हूँ ॥ मन से काले धंधे॥
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